बेंगन की खेती में लगने वाले सभी किट और रोग के नियंत्रण की जानकारी | brinjal diseases

आज हम आप को बेंगन ( भट्टा) की खेती ( brinjal diseases and control ) में लगने वाले सभी रोगो के बारे में जानकारी देंगे जिससे आप समय पर अपनी फसल को सभी रोगो से बचा सकते है इसमें सभी रोगो की जानकारी हम आप को देंगे और रोगो के नियंत्रण के बारे में भी जानकारी भी देंगे

बेंगन की खेती में बहुत ही अधिक मात्रा में रोगों का और कीटो का प्रभाव बना रहता हे जिससे इसकी पैदावार और बेंगन की गुणवता भी प्रभावित होती हे इसकी खेती में अच्छी पैदावर और लाभ के लिये आप समय पर इसके अंदर रोगों की रोकथाम करते रहे

brinjal diseases and control
brinjal diseases

इस पोस्ट में हम आप को बीमारी का नाम, बीमारी के लक्षण , बीमारी का नियंत्रण , बीमारी की रोकथाम के लिए दवाइयों की जानकारी दूंगा , जिससे आप अपनी फसल में आने वाले रोगो की रोकथाम आसानी से कर सकेंगे और रोगो की पहचान भी कर सकेंगे

आप यहा दी गई जानकारी को पूरा पढिये यहा हम आप को बेंगन में रोगों की रोकथाम के लिये दवाओ की जानकारी देंगे और आप इन link के माध्यम से दवाओ को आसानी से घर बेटे ही खरीद भी सकते हे दवाओ के link आप को post के अंत में मिलेगा

brinjal diseases – बेंगन की खेती में सभी रोगो की जानकारी

डम्पिंग ऑफ़ ( आद्र गलन )                                        

रोग के लक्षण – इस रोग के अंदर नर्सरी की अवस्था में बहुत ही अधिक नुकसान होने की संभावना होती हे बरसात के मौसम में यह रोग बहुत अधिक परेशान करता हे इसमें बीज अंकुरण के बाद तना ख़राब होकर या अधिक पानी की वजह से पौधे ख़राब होकर जमीन पर गिरने लगते हे

यह रोग किसी भी फसल को लगाने के समय बहुत ही अधिक परेशान करता हे यह रोग नर्सरी की अवस्था में अधिक नुकसान पहुचाता हे

रोग का नियंत्रण – बुहाई के लिए अच्छी किस्म के बीज का चुनाव करना चाहिए बीज की बुहाई हमेसा बीज उपचारित कर के ही करे बार- बार एक ही जमीन में एक ही नर्सरी तैयार नहीं करे , बीज को बुहाई के पहले ट्राइकोडर्मा , थीरम, बाविस्टिन जैसी फंगीसाइड से उपचारित जरूर कर लेनी चाहिए

नर्सरी की कयारी की ऊपरी जमीन को भी फंगीसाइड से स्प्रे जरूर करे बीज की बुहाई के पहले , नर्सरी को 5 से 7 दिन के अंदर फंगीसाइड को पानी में मिला कर स्प्रे करे बीज की बुहाई के पहले नर्सरी की कयारी को उपचारित जरूर करे

लिफ़ स्पॉट ( पत्ती दब्बा रोग  ) 

रोग के लक्षण – इस रोग में रोग से प्रभावित पत्तिया समय से पहले ही पौधे से गिरने लगती हे इसमें पौधे पर फूल और फल कम आने लगते है जिसके कारण बेंगन की खेती का उत्पादन भी कम हो जाता है

इसमे पत्तियों पर घाव होने लगते है जो धब्बो की तरह दिखाई देने लगते है जब ये धब्बे अधिक मात्रा में होने लगती है तब तब पत्तियों का रंग पूरी तरह बदल जाता है और पत्तिया जलने की तरह दिखाई देने लगती है

रोग का नियंत्रण – इस रोग के प्रति सहनशील किस्मो का चुनाव करके आप इस रोग से फसल को ख़राब होने से बचा सकते है आप इस रोग की रोकथाम करने के लिए 1% बोडो मिश्रण का स्प्रे फसल पर कर सकते है और आप 2 ग्राम कॉपर ऑक्सी कलोराइड  दवा या बाविस्टिन 0.1% दवा का स्प्रे प्रति लीटर पानी में मिला कर करना चाहिए इससे पत्तियों पर से होने वाले धब्बे का नियंत्रण हो जाता है

आप इस रोग से अधिक प्रभावित पोधो को खेत से निकल क्र भी इस रोग की रोकथाम क्र सकते हे

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नेमाटोड ( जड़ गाठ रोग )

बेंगन की फसल में नेमाटॉड एक मुख्य रोग हे जो बेंगन में पुरे उत्पादन को ही प्रभावित कर देती हे लगातार अगर नमी खेतो में बनी रहती हे वहा यह रोग अधिक रहता हे ईस रोग में पोधे की जड़ो में गाठ के गुछे बन जाते हे पोधे में ईस रोग के होने के बाद में बहुत से अन्य रोग भी बढने लगते हे

रोग के लक्षण – ईस रोग में पोधे की जड़ो में छोटी छोटी गाटे गुच्छे में होने लगती हे जिससे पोधे विकास कम हो जाता हे और उत्पादन पूरी तरह कम होने लगता हे ईस रोग से पोधे में उकठा रोग बढने लगता हे जिससे पोधे सूख कर मरने लगते हे

रोग का नियंत्रण केसे करे – जेविक तरीके से नेमाटॉड का नियंत्रण करने के लिये आप 200 किलो निम् खली को प्रति एकड़ खेत में फेला कर या 2 किलो हरजेनियम ट्राईकोडर्मा को आप गोबर की खाद में मिला कर के एक एकड़ खेत में बिखेर दे

बेंगन की फसल में पोधे लगाने के बाद में बिच-बिच में आप गेंदे के पोधे भी लगा दे जिससे बेंगन में नेमाटॉड की बीमारी में रोकथाम होती हे इसकी रोकथाम के लिये आप गर्मी के मोसम में खेत की अच्छी तरह बहाई करके भी ईस रोग का नियंत्रण कर सकते हे ईस रोग की अधिक शिकायत होने पर आप फसल को बदल- बदल कर ही बोये , आप नेमोटोड की रोकथाम के लिये नेमोटोड फुंगीसाईंड पाउडर का स्प्रे करे

अल्ट्रनेरिया लिफ़ स्पॉट 

रोग के लक्षण – इस बीमारी के अधिक प्रभाव होने पर पत्तिया पौधे से समय से पहले अलग हो जाती हे पत्ते बहुत ही जलधि पिले होने लगती हे और बड़े बड़े धब्बे पौधे की पत्तियों और फल पे भी लगने लगते हे यह रोग पौधे के फलो और पत्तियों दोनों को ही प्रभावित करते है

रोग का नियंत्रण – इस रोग के प्रभाव से प्रभावित पौधे को आप खेत से निकल कर के जला दे जिससे रोग खेत में अधिक फेलता नहीं हे इस रोग की रोकथाम के लिए आप खेत में बाविस्टिन 0.1% का स्प्रे समय समय पर करते रहे जिससे खेत में इस रोग की रोकथाम समय पर हो जाएगी और खेत का उत्पादन कम नहीं होगा

छोटा पत्ता रोग ( लिटिल लीफ रोग )

रोग के लक्षण – बेंगन की खेती में लगने वाली बीमारियों में यह सबसे ख़राब ( गंभीर ) वायरस जनित बीमारी हे यह रोग से ग्रषित पौधा झाड़ी की तरह दिखाई देता है ईस रोग में पोधे का सही तरह से विकाश नहीं हो पाता हे इस रोग में पौधे की अधिकतर पत्तिया पिले रंग की और छोटी – छोटी रहती हे

लीफ होपर द्वारा यह रोग अधिक फेलता हे पोधे पर

जिसके कारन बेंगन के पौधे पर आने वाले फूलो की संख्या ( नाम मात्र ) बहुत ही कम हो जाती हे यह रोग पौधे पर आने के बाद इसे रोकना बहुत ही मुश्किल हो जाता है इस रोग से पौधे पर मिलने वाला बैंगन का उत्पादन भी बहुत ही कम रहता है इन पौधे पर मिलने वाला फल भी कठोर , छोटा , और आकर में टेड़ा- मेदा होता है

रोग का नियंत्रण – सबसे पहला काम आप यह करे की इस रोग से ग्रषित पौधे को आप खेत से हटा कर जला दे जिससे यह रोग अन्य पौधे में फैलेगा नहीं समय पर ईस रोग का नियंत्रण करने के लिये आप आवश्यक दवा का स्प्रे फसल पर करे

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मोजेक वायरस

रोग के लक्षण – यह बीमारी वायरल के कारण बढ़ती है ईस रोग में पोधे की पत्तिया निचे की तरह मुड़ी हुई होती हे पत्तिया मुड़ने के बाद धब्बेदार हो जाती हे वायरस का प्रकोप होने पर पत्तियों के कोने पीले कलर के हो जाते हे धीरे धीरे यह गहरे भूरे कलर की हो जाती हे

बैक्टीरियल विल्ट 

रोग के लक्षण – बैक्टीरियल विल्ट बेंगन की खेती में बहुत ही गंभीर बीमारी हे इसके प्रभाव में पत्तिया सुकने और गिरने लगती है अधिक प्रभाव में पूरा पौधा हि सुखने लगता है यह रोग बरसात के मोसम में अधिक होता हे ईस रोग से पोधे पर और भी बहुत से रोग फेलने लगता हे

रोग का नियंत्रण – इस रोग की रोकथाम के लिए आप इस रोग की रोग प्रतिरोधक किस्मो का चुनाव करे रोगग्रस्त पौधे को खेत से निकाल कर उसे जला दे

वर्टिसिलयम विल्ट

रोग के लक्षण – यह रोग बेंगन के माध्यम और युवा पौधे को जलधि प्रभावित करता हे इस रोग के प्रभाव से पौधे पर फल और फूल आने बहुत ही कम हो जाते हे ईस रोग से सक्रमित फल गिर जाते हे संकर्मित होने के बाद पत्तिया मुरझा के सूखने लगती हे

रोग का नियंत्रण – इस रोग से बचने का सबसे अच्छा उपाय यह हे की इसमें आप हमेसा फसल चक्र को अपनाते रहे जिससे यह रोग फसल में कम होता हे

फल सड़ना – fruit rot

रोग के लक्षण – इस रोग के अंदर फल पानी से भीगने के कारण जले हुए और सड़े हुए दिखाई देते हे अधिक नमी खेत में होने पर यह रोग खेत में दिखाई देता हे इस बीमारी के अंदर बेंगन के पौधे का उत्पादन बहुत ही कम हो जाता हे और फल पौधे पर ही सड़ने लगते हे इस रोग के प्रभाव मै फल भूरे रंग के होकर सड़ने लग जाते हे

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रोग का नियंत्रण – इस रोग से प्रभावित फलो को आप नस्ट कर दे जिससे पौधे पर रोग बढ़ेगा नहीं इस रोग के प्रभाव दिखाई देने पर आप समय पौधे पर प्रभावी दवाई का स्प्रे करते रहे इसकी रोकथाम करने के लिये आप खेत में पानी देने का अन्तराल थोडा बड़ा दे ( खेत में पानी अधिक समय में दे )

बेंगन में लगने वाले किट – brinjal diseases

मिली बग किट

यह रोग बेंगन भिन्डी , मिर्च , कपाश में अधिक होता हे मिली बग किट के कारण होने वाले रोग को दहिया रोग भी कहा जाता हे

रोग के लक्षण – ईस रोग के कारण पोधे पर सफ़ेद – सफ़ेद कलर के किट और अंडे दिखाई देते हे यह किट सफ़ेद कलर का चिपचिपा किट होता हे यह किट पोधे की पत्तियों , फूलों , फलो , के उपर सफ़ेद कलर की परत बना लेते हे ईस रोग से पत्तिया पिली होकर मुड़ने लग जाती हे और यह पोधे पर एक चिपचिपा प्रदार्थ छोड़ता रहता हे

रोग का नियंत्रण – खेत मे खरपतवार को समय समय पर निकालते रहे , ईस रोग से बचने के लिये आप अच्छी क्वालिटी के बिज का चुनाव करे , अधिक प्रभावित होने पोधे को खेत से निकाल दे ईस रोग का धयान बेंगन की फसल में रखना जरुरी होते हे

ईस रोग से बचाव करने के लिये आप क्लोरोफायरिफास का स्प्रे करे ईस रोग के हल्का सा भी दिखाई देने पर खेत में दवा का स्प्रे जरुर करे जिससे ही आप ईस रोग से बचाव कर सकते हे

रेड स्पाइडर माइट्स

यह किट बेंगन की खेती के अंदर बहुत ही अधिक होता हे पत्तियों के निचे के भाग में यह मकड़िया रहती हे जो पत्तियों को बहुत ही अधिक नुकशान पहुचाती हे पत्तियों के निचे ईस मकड़ियो की पूरी कोलोनिया बन जाती हे जब यह रोग फसल में आता हे

यह किट शिशु और व्यस्क दोनों ही रूपों में फसल में नुकशान पहुचाते हे ईस रोग के प्रभाव से पोधे का कलर बदलने लगता हे इसके प्रभाव से पत्तिया पिली , भूरी , सफ़ेद होने लगती हे

ईस रोग के बहुत अधिक हो जाने पर पत्तियों पर जाले आ जाते हे और पत्तिय पूरी तरह जाले से ढक जाती हे जिससे पोधे का उत्पादन पूरी तरह कम हो जाता हे

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फल और तन्ना छेदक किट

रोग के लक्षण –  यह किट तेयार फलो को खाकर के ख़राब कर देता हे यह किट फल की कोपलों व् फूलों को खाकर के उत्पादन को बहुत ही कम कर देती हे ईस रोग से हमे मिलने वाला उत्पादन भी बहुत ही ख़राब कवालीटी का मिलता हे ईस किट के प्रभाव से ही फल काना हो जाता हे

रोग का नियंत्रण – ईस रोग को नियन्त्रण करने के लिये बाजार में बहुत सी दवाईया अभी उपलब्द हे जिन्हें उपयोग करके आप अपने बेंगन की फसल को बचा  सकते हे  इसके लिये आप प्रोफेक्स सुपर , UPL का उलाला , लारा , लार्विन , जेसी दवाओ को रोग और पोधे की अवस्था के अनुसार काम में ले सकते हे

इसके नियंत्रण के लिये आप इमामेक्टिन बेंजोएट 5 % sg का भी प्रयोग कर सकते हे

सफ़ेद तितली 

रोग के लक्षण – ईस रोग में बेंगन की पत्तिया पर सफ़ेद तितली के जेसे मखिया दिखाई देती हे जो सफ़ेद , मटमैले रंग की होती हे यह पोधे की पत्तिया का रस चूस कर पोधे को कमजोर कर देते हे और बहुत से रोगों को फसल में फेला देता हे

बेंगन की खेती में रोगों की रोकथाम के लिये दवाईया यहाँ से खरीदिये – online

फंगीसाइड पाउडर

diseases and control 

NOTE – बेंगन की खेती में विशेष धयान रखने वाली बाते
  • बेंगन की खेती में खरपतवार को नहीं पनपने देना चाहिए
  • बेंगन की खेती के लिये हमेशा खेत को बदलते रहे जिससे बहुत से रोगों में फायदा होता हे
  • बेंगन के खेत में पिली और नीली किट नियंत्रण वाली पट्टियों का उपयोग जरुर करे
  • गर्मियों के मोसम में खेत की गहरी बुहाई करके कुछ समय के लिये छोड़ देना चाहिये
  • बेंगन की नुर्सरी हेमेशा अच्छी जमीन में तेयार करे
  • बेंगन की खेती में फोरोमेंन ट्रेम्प का उपयोग जरुर करे इससे कीटो की रोकथाम होती हे
  • बिज की बहाई के समय बेंगन के बिज का बिजउपचार करना आवश्यक हे
  • खेत में खाद बिखेरते समय खाद में ट्राईकोडरमा पाउडर को मिक्स करके खेत में बिखेर दे
  • रोगों से बचने के लिये आप रोग प्रति रोधक किस्मो का चुनाव करे
  • बेंगन की फसल में खाद और पोषण का समय पर ध्यान रखना चाहिए
  • बेंगन में किसी भी रोग का प्रभाव दिखाई देने पर दवाई का स्प्रे करते रहे
  • बेंगन की खेती में बिच -बिच में आप गेंदे के पोधे को लगा कर के रोगों को कम कर सकते हे

आप सभी को यह जानकारी अच्छी लगी हे तो आप इसे अन्य किसानो को शेयर कर (भेज ) सकते हे यह सभी जानकारी के आधार पर बेंगन की खेती में लगने वाले किट और रोग का पता लगा सकते और नियंत्रण कर सकते हे

बेंगन की खेती में लगने वाले सभी किट और रोग के नियंत्रण की जानकारी | brinjal diseases

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