रजनीगंधा की वैज्ञानिक खेती कैसे शुरू करे | किसान कमाएंगे मोटा मुनाफा | how to grow Rajnigandha flower

फूलो की खेती भारत में बहुत अधिक की जाती हे जिनमे ही एक रजनीगंधा फूल ( how to grow Rajnigandha flower ) हे जो एक सफ़ेद कलर का फूल होता हे जिसकी सुगंद बहुत अच्छी होती हे फूलो के लिए वर्तमान में रजनीगंधा की खेती भी बहुत बढ़ने लगी हे

रजनीगंधा की खेती में खर्चा बहुत कम होता हे इसको एक बार लगाने के बाद हम तीन साल तक उत्पादन ले सकते हे जिनसे हमे सालभर ताजा फूल मिलते रहते हे

रजनीगंधा की वैज्ञानिक खेती कैसे शुरू करे | किसान कमाएंगे मोटा मुनाफा | how to grow Rajnigandha flower
how to grow Rajnigandha flower

रजनीगंधा की खेती किसान अप्रेल से जुलाई माह तक कर सकते हे जो इसकी खेती के लिए अच्छा समय माना जाता हे इसकी खेती में यह भी फायदा हे की इसमें रोग और कीटो का प्रभाव बहुत ही कम होता हे

रजनीगंधा की खेती भारत में अधिक ,मात्रा में की जाती हे राजनीगंधा के बहुत सारे उपयोग हे रजनीगंधा की खेती फूलो के लिये की जाती हे

जिससे रजनीगंधा के फूलो से बाद में शादी के लिये बुके ,सजावट ,मंदिर में चढ़ाने में , फूलो का इत्र , फूलो का परफुयम और बहुत से कामो में रजनीगंधा का उपयोग किया जाता हे

रजनीगंधा का परिचय – how to grow Rajnigandha flower

रजनीगंधा बारह महीने मिलने वाले फूल हे रजनीगंधा का वैज्ञानिक नाम पॉलिथेस टयूवरोजा हे यह एसेपरागेऐसी कुल का पौधा हे जो शाकीय पौधा होता हे यह सुगन्धित और खेती योग्य पौधा हे इसे मूलरूप में मेक्सिको का पौधा माना जाता हे

इसे हिंदी में रजनीगंधा कहा जाता हे इसमें रजनीगंधा का अर्थ सुगन्धित रात से हे जो अर्थ रजनी का ( रात ) और गंधा का ( सुगन्धित ) हे इसे रात की रानी भी कहते हे अभी वर्तमान में रजनीगंधा की रंगीन किस्मो का भी मार्केट में चलन हे

रजनीगंधा बीज की किस्मे और मात्रा -verayti

रजनीगंधा की मुख्यत 2 वेरायटी हे singal verayti और dabal verayti किसानो को अपनी सुविधा के अनुसार दोनों ही वेरायटी की खेती करनी चाहिये इसके बीज चपटे होते हे एक हेक्टेयर भूमि में 1000 से 1200 किलोग्राम बीज की आवशयकता होगी

अच्छी साइज के कन्द ( बीज  ) से  हमें 4 से 5 महीने में ही रजनीगंधा के फूल मिलने लगते हे इसका पौधा सामान्यत 40 से 70 सेमी के लगभग ऊचा होता हे

रजनीगंधा की खेती मुख्यत फूल और फूल से इत्र बनाने के लिए किया जाता हे

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मिट्टी का चुनाव केसा हो – how to grow Rajnigandha flower 

  • रजनीगन्धा की खेती में हमारे देश में सभी तरह की मिट्टी में हम कर सकते हे जिनमे दोमट – बलुई  और दोमट मिटटी सबसे अच्छी मानी जाती हे
  • अच्छी जलनिकास वाली जगह पर चिकनी मिटटी में भी इसकी सकते हे भूमि का ph 6 से 7 सबसे अच्छा होता हे
  • जिसमे हमें अधिक उत्पादन और लाभ प्राप्त होने की संभावना हे इसकी बुहाई हम रजनीगंधा के बल्ब या कंद से कर सकते हे गर्मी के शुरआत में ही खेत की अच्छी तरह से गहरी जुताई कर देनी चाहिए

भारत में की खेती कहा होती हे

रजनीगंधा फूलो की मांग बढ़ने के कारण अब इसकी खेती भारत के सभी बड़े शहरो के पास अधिक होने लगी हे पहले रजनीगंधा की खेती पश्चिम-बंगाल , महाराट्र के कुछ इलाके , तमिलनाडु आधी जगह अधिक होती थी

परन्तु अब रजनीगंधा की व्यवसायिक खेती हमारे देश में महारास्ट्र , उत्तरप्रदेस पश्चिम-बंगाल ,तमिलनाडु , कर्नाटक हिमाचल प्रदेश पंजाब हरियाणा में अधिक की जाती हे

रजनीगंधा का उपयोग

रजनीगंधा के फूलो का इत्र बनाने में ,परफुयम , सौंदर्य प्रसाधन में , परफ्यूम , बनाने में किया जाता हे रजनीगंधा के तेल का उपयोग पेय पर्दाथ , माउथ वाश , हेंड वाश , आयुर्वेदिक दवाओं , डेंटल क्रीम ,सुगन्धित पेय , पान मसाला , बनाने में किया जाता हे

इनके फूलो का उपयोग मंदिरो में चढ़ाने ,में शादी समारोह में डेकोरेशन में , बुके में ,और भी विभिन्न रस्मो में इनके फूलो का उपयोग रहा हे

रजनीगंधा के लिये जलवायु

Rajnigandha flower यह एक गर्म जलवायु का पौधा हे इसमें हलके पाले का कोई प्रभाव नहीं होता हे अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती हे

रजनीगंधा की वैज्ञानिक खेती कैसे शुरू करे | किसान कमाएंगे मोटा मुनाफा | how to grow Rajnigandha flower
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सिंचाई कैसे करे

रजनीगंधा के कंदो को लगाने के पहले खेत में सिचाई कर देनी चाहिए कंद लगा कर अगली सिचाई कंदो के अच्छी तरह अंकुरण होने के बाद ही करनी चाहिए इसमें नियमित सिचाई की आवश्यकता होती हे

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फसल उगाने का तरीका

रजनीगंधा के अच्छे फूलो के लिए सही आकार के कंद ( बीज ) का उपयोग करना चाहिये रजनीगंधा के कंद को अप्रैल से जुलाई के मध्य लगाना चाहिये 2 सेमी व्यास से बड़े कंद ( बीज ) अच्छी फसल के लिये सबसे उपर्युक्त हे

रजनीगंधा के बीजकी गहराई 4 से 6 सेमी और बीज के बिच में 10 से 15 सेमी की दुरी और लाइन से लाइन की दुरी 20 से 30 सेमी का ( अंतराल ) होनी सबसे अच्छा होता हे

फसल तुड़ाई और कटाई का समय

रजनीगंधा के कंद लगाने के बाद 4 से 5 महीने के अंदर इसमें फूल आने लगते हे अच्छी तरह से तैयार पौधे फूलो को शाम के समय काट लेना चाहिये कटाई के बाद फूलो को समय पर बाजार में भेज देना चाहिये

इत्र बनाने के लिए फूलो को समय पर आसवन इकाई पर भेज देना चहिये

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Rajnigandha flower – का भण्डारण और आसवन – केंद

  • रजनीगंधा के फूलो को शुष्क वातावरण और हल्की हवा में भण्डारण करना चाहिये
  • तेल प्राप्त करने के लिए फूलो का आसवन विधि से उपयोग किया जाता हे
  • फूलो को बाजार भेजने के लिए सही पेकिंग का स्तेमाल करना चाहिए जिससे फूलो की क्वालिटी ख़राब ना हो
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