Mirch ki Kheti kaise karen | मिर्च की खेती कैसे करे | मिर्च में लगने वाले किट और रोग का नियंत्रण कैसे करे

Mirch ki Kheti kaise karen – भारत में मिर्च एक मुख्य फसल के तोर पर पैदा की जाति है जो भारत में सभी जगह आसानी से की जाती है भारत के सभी राज्यों में इसकी खेती की जाती हे मिर्च की खेती भारत में हरी मिर्च और लाल मिर्च के लिये की जाती है मिर्च में विटामिन ( A और C ) पाया जाता है

Mirch ki Kheti kaise karen | मिर्च की खेती कैसे करे | मिर्च में लगने वाले किट और रोग का नियंत्रण कैसे करे
Mirch ki Kheti kaise karen

मिर्च में कड़वापन व् तीखापन कैप्सेसिन नमक तत्व के कारण होता है मिर्च का लाल रंग केप्सेथिन तत्व के कारण होता है Mirch ki kheti में समय का ध्यान रखना बहुत जरुरी है

मिर्च का उपयोग हरी मिर्च , लाल मिर्च के तोर पर किया जाता है और मिर्च का उपयोग सब्जियों में चटनी में अचार में मसलो में किया जाता है जो ताजी, सुखी , पावडर के रूप में की जाती है मिर्च के बिना सभी सब्जियों का स्वाद फीका ही होता है

मिर्च की खेती हरी मिर्च के लिए व् लाल मिर्च के लिए और अचार के लिए अलग-अलग होती है

Mirch ki kheti kaise karen | कैसे करे सम्पूर्ण जानकारी 

आप को यहां यह सभी जानकारी मिलेगी जिसे आप जानना चाहते हे या आप के सवाल होंगे इस पोस्ट को पढ़ कर आप अपने सभी सवालों के जवाब मिल जायेंगे

मिर्च की – उन्नत किस्मे
मिर्च की खेती के लिए बीज की मात्रा
मिर्च की खेती का समय , कब लगाए
जलवायु
मिर्च के लिए भूमि का चुनाव
मिर्च के लिए खाद की पूर्ति
मिर्च की नर्सरी कैसे तैयार करे
गर्मी में मिर्च की खेती कैसे करे
सर्दी में मिर्च की खेती कैसे करे
हरी मिर्च की खेती कब करे कैसे करे
मिर्च की खेती कौन-कौन से महीने में की जाती है
मिर्च की खेती में उत्पादन और लाभ
लाल मिर्च के उत्पादन में कोण सा राज्य अग्रणी है
मिर्च की खेती में लगने वाले रोग उपचार

मिर्च की – उन्नत किस्मे

मिर्च की खेती में अधिक उत्पादन के लिए उन्नत किस्मो का चुनाव करना भी बहुत जरुरी है

किस्मे – CH-1, CH-27, पंजाब सिन्दूरी, पंजाब तेज, पूसा जवाला, पूसा सरदार ,अर्का स्वेता, कशी अमोल, अर्का बसंत, सिजेंटा इंडिया और सेमिनिस वेजिटेबल, नामधारी सीड्स, अंकुर सीड्स, सिंदूर, उन्नत किस्मे हे

मिर्च की खेती में अलग-अलग राज्य में अलग-अलग बीज का उपयोग किया है जो वहा की जमीन और वातावरण के अंदर अधिक उत्पादन देती है

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मिर्च की खेती के लिए हाइब्रिड बीज की मात्रा –400 से 500 ग्राम बीज की 1 हैक्टेयर भूमि के लिए आवश्यक्ता होगी देसी मिर्च के लिए बीज की मात्रा 1000  – 1200 ग्राम होनी चाहिए

मिर्च की खेती का समय मिर्च कब लगाए

मिर्च की खेती के लिए
मानसून में – जून जुलाई में – खरीफ की फसल
सर्दियों में – अक्टुम्बर में
गर्मियों में – जनवरी फरवरी सबसे अच्छा समय है

जलवायु

मिर्च की खेती भारत में सभी जगह और सभी मौसम में की जाती है लेकिन मिर्च की अधिक खेती गर्मी के मौसम में की जाती है मिर्च गर्म मौसम में अच्छा उत्पादन देती है जिसके लिए तापमान 20 से 25 डिग्री का सबसे सही रहता है

जिसमे थोड़ी गर्मी और नमी भी बनती रहती है बारिश में भी मिर्च की फसल को नुकसान होता है बारिस से पोधो की पत्तिया और फूल और फल गिरने लगते है जो उत्पादन को कम करती है फूल आने के समय गर्म और सुखी हवा से फूल गिरने लगते है

मिर्च की फसल के लिए भूमि का चुनाव

मिर्च के लिए Ph 6 से 7 के लगभग का सबसे अच्छा होता है मिर्च की खेती ph 8 तक की भूमि में भी की जा सकती है मिर्च की खेती सभी तरह की जमीन में की जा सकती है पर  मिर्च की फसल के लिए काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है

लेकिन सिचाई की अच्छी सुविधा है तो किसान बलुई मिटटी और अच्छे जलनिकास वाली मिटटी नरम, चिकनी, दोमट मिटटी में भी मिर्च की बुहाई कर सकते है

जिस खेत में आप मिर्च की बुहाई करना चाहते है उस खेत की 2 से 3 बार बुहाई कुछ -कुछ समय के अंतराल में करवा कर ही आप मिर्च की रोपाई करे जिससे आप को खरपतवार की परेशानी नहीं होगी खपतवार कम उगेगा

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मिर्च की फसल के लिए खाद

प्रति एकड़ 150-250 किवंटल के लगभग सड़ी हुई गोबर की खाद भी पहली बुहाई के बाद खेत में बिखेर दे और बाद में बुहाई कर देनी चाहिए या आप 50 से 60 किवंटल वर्मीकम्पोस्ट खेत में डाल सकते है पोषण के लिए नत्रजन – फास्फोरस – पोटास की 120 किलो , 60 किलो , 80 किलो मात्रा का भी प्रयोग करे

पोषण के लिए समय-समय पर पानी में घुलनशील खाद भी देते रहै

Mirch ki Kheti kaise karen – मिर्च की फसल में पूछे जाने वाले सवाल  

मिर्च की नर्सरी कैसे तैयार करे

  • मिर्च की पौध के लिए हमें मिर्च की नर्सरी तैयार करनी होगी जो अलग – अलग जगह के हिसाब से अलग – अलग तरह से तैयार की जाती है अच्छी पौध के लिए नर्सरी को ऊंचा उठाकर बनाना सबसे अच्छा रहता है
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  • नर्सरी की कयारी के लिए कयारी की चौड़ाई 3 फ़िट और लम्बाई जगह और सुविधा के अनुसार 10 फिट से 20 के लगभग बड़ा सकते है कयारी की उचाई 15 से 20 सेमी की रखनी चाहिए जिससे जयादा पानी साइड में बह कर निकल जायेगा
  • कयारी में वर्मी कम्पोस्ट को सही तरह मिक्स करके बीज की बुहाई कर देने के बाद कयारी के ऊपर भी वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद की परत बिछा कर सिचाई केर सकते है
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  • बुहाई के एक दिन पहले 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिला कर क्यारी में स्प्रे कर सकते है या क्यारी को अच्छी तरह से तर भी कर सकते है और
  • क्यारी में वर्मीकम्पेस्ट डालने के बाद 40-50 ग्राम के फोरेट दवा का उपयोग क्यारी में छिड़क कर अच्छी तरह खाद में मिक्स कर
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  • देशी बीज की बुहाई करनी है तो आप 2 ग्राम थाइरम दवा को प्रति किलोग्राम बीज में बीज उपचारित करे
  • बीज की बुहाई के लिए क्यारी में 5 – 5 सेंटीमीटर की दुरी पर लाइनों में 1 सेंटीमीटर की गहराई में बीज की बुहाई करनी है
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  • बीज उगने के बाद बीज के साथ -साथ खरपतवार भी उगने लगता है इसे समय समय पर निकलते रहै
  • पौध उगने के बाद जड़ गलन की रोकथाम के लिए मेटलैक्सिस ंज का २ ग्राम १० लीटर पानी में मिला कर सप्रे करे
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  • समय समय पर सिचाई करने के बाद 25 दिन लगभग मिर्च की नर्सरी तैयार हो जाएगी
  • नर्सरी को हमेसा खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए
  • Mirch ki Kheti kaise karen

नोट – नर्सरी आज कल प्रो-ट्रे में भी तैयार किया जाता है जिसके लिए वर्मीकम्पोस्ट और कोको-पिट का उपयोग किया जाता है

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गर्मी में मिर्च की खेती

गर्मियों में – जनवरी फरवरी सबसे अच्छा समय है गर्मियों की फसल के लिए

होली के आस-पास खेतो की बुहाई की तैयारी करते है मिर्च की पौध लगाने के एक से डेढ़ माह बाद मिर्च लगनी शुरू हो जाती है जुलाई के लगभग मिर्च की फसल लगभग पूरी हो जाती है

सर्दी में मिर्च की खेती

सर्दियों में मिर्ची की फसल लेने के लिए
मानसून में – जून जुलाई में पौध की रुपाई करनी चाहिए

जुलाई माह में मिर्च की पौध तैयार करके जुलाई के लास्ट सफ्ताह में पौध की रोपाई करके दीपावली के लगबग मिर्च की फसल ले सकते

हरी मिर्च की खेती कब करे कैसे करे

बहुत से किसान साल में हरी मिर्च की दो फसल लेते है वह पहली फसल के लिए होली के आस – पास खेतो की बुहाई की तैयारी करते है मिर्च की पौध लगाने के एक से डेढ़ माह बाद मिर्च लगनी शुरू हो जाती है

जुलाई के लगभग मिर्च की फसल लगभग पूरी हो जाती है हरी मिर्च की दूसरी फसल के लिए जुलाई माह में मिर्च की पौध तैयार करके जुलाई के लास्ट सफ्ताह में पौध की रोपाई करके दीपावली के लगबग मिर्च की फसल ले सकते

हरी मिर्च की खेती के लिए पौध जुलाई माह में लगाई जाती है हरी मिर्च की पौध जुलाई माह में बरसात होने के कारण पौध अच्छी तरह से तैयार हो जाती है और 20-25 दिन में पौध अछि तरह तैयार हो जाती है 25 दिन की पौध जमीन में रूपाई करने के लिए अच्छी होती है

बरसात के मौसम में पौध जल्दी सेट हो जाती है जयादा गर्मी में पौध की रूपाई करना अच्छा नहीं होता है गर्मी में पौध की जड़ सही तरह सेट नहीं होती

मिर्च की खेती कौन-कौन से महीने में की जाती है

मानसून में – जून जुलाई में
सर्दियों में – अक्टुम्बर में
गर्मियों में – जनवरी फरवरी सबसे अच्छा समय है

मिर्च का उत्पादन और लाभ

हरी मिर्च का उत्पादन प्रति हैक्टेयर
15 से 25 टन का लगभग होता है

मिर्च का औसत भाव 10 से 20 रूपये के लगभग होता है
जिससे प्रति हैक्टर [ 15 x 1000 x 15 ] = 2,25,000 से [ 20 x 1000 x 10 ] = 3 00,000 के लगभग आय प्राप्त होती है

मिर्च की खेती में आप 1 लाख से 2 लाख के लगभग शुद्ध लाभ हो जाता है

लाल मिर्च के उत्पादन में कोण सा राज्य अग्रणी है

लाल मिर्च का उत्पादन तेलगांना , मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में अग्रणी तोर पर किया जाता है

मिर्च में लगने वाले किट और रोग का नियंत्रण

1 – मिर्ची में थ्रिप्स का उपचार

यह रोग पौधे में थ्रिप्स नामक वायरस के कारण होता है यह किट पौधे की पत्तियों से रस को चूसकर के पौधे को कमजोर कर देता हे यह रोग पौधे की रुपाई के 15 दिन के बाद से ही पौधे पर लगने लगता है

इस रोग के प्रभाव से पत्तिया ऊपर और निचे की तरफ मुड़ने लगती हे इस रोग से प्रभावित पौधे पर फूल समय पर नहीं आते हे और उत्पादन गिरने लगता है यह रोग फसल पर अधिक लगने आप फसल से उत्पादन की आशा नहीं कर सकते हे इस रोग से पौधे का विकाश भी पूरी तरह रुक जाता है

बचाव
ईस रोग से बचाव के लिये आप सिंजेंटा के पेगासस का स्प्रे अपनी फसल पर करे
बायर कम्पनी की एडमायर का स्प्रे भी आप अपनी फसल पर थ्रिप्स के कंट्रोल के लिये क्र सकते है और भी बहुत सी दवाइया हे

जिनका उपयोग आप थ्रिप्स के नियंत्रण लिए अपनी फसल पर कर सकते है


2 – मिर्च में माइट ( मकड़ी ) रोग नियंत्रण

इस किट के कारण पत्तिया निचे की तरफ मुड़ने लगती हे यह किट भी पौधे की पत्तिया से रस चूसकर के पौधे को नुकशान पहुंचाते है यह मकड़ी कई बार पौधे के शीर्ष भाग को ढक लेती हे यह मिर्च की पत्तियों पर छोटी – छोटी लाल कलर की दिखाई देती हे

बचाव
माइट किट के नियंत्रण के लिये आप ओमाइट कीटनाशक का उपयोग अपनी फसल पर करे मकड़ी के नियंत्रण के लिये आप और भी बहुत सारी दवाओं का उपयोग कर सकते हे


3 – मिर्च में माहु (एफिड्स ) किट का नियंत्रण

मिर्च की फसल में माहु किट भी थ्रिप्स किट की तरह ही नुकसान पहुंचाता हे माहु किट भी मिर्च की पत्तियों से रश चूसकर के पौधे को कमजोर कर देता हे

यह रोग पौधे के उत्पादन को पूरी तरह कम कर देता है यह किट हरे रंग के या भूरे रंग के होते है

बचाव
ईस रोग से बचाव के लिये आप सिंजेंटा के पेगासस का स्प्रे अपनी फसल पर करे
बायर कम्पनी की एडमायर का स्प्रे भी आप अपनी फसल पर थ्रिप्स के कंट्रोल के लिये क्र सकते है

4 – सफ़ेद मक्खी का नियंत्रण

यह किट सफेद कलर का होता हे जो पौधे की पत्तियों और तनो पर चिपककर के रस चूसते है इससे पत्तिया निचे की तरह घूमने लगती है इस किट के कारण पत्तिया और तने चिपचिपे हो जाते है कई बार इस किट के अधिक प्रभाव से पौधा सफ़ेद – सफ़ेद दिखाई देने लगती है

बचाव
सफ़ेद मखी से बचाव के लिये थायोमिथाक्जाम 25% WG का स्प्रे आप पौधे पर करके लाभ ले सकते है

मिर्च की खेती में लगने वाले रोग और उपचार

मिर्च की खेती में ऐसे बहुत सारे रोग लगते हे जो आप की सारी फसल को बर्बाद कर सकते है इनका समय पर आप नियंत्रण नहीं करते हे तो आप मिर्च की खेती में नुकशान में रह सकते है

मिर्च की खेती में कोनसी दवा डाले इसकी भी जानकारी आप को यह मिलेगी

1 मिर्च में मरोड़या रोग

मीर्च की फसल में यह रोग सबसे अधिक होता हे इस रोग को अलग अलग क्षेत्रों में कुकड़ा, मरोड़या, चूरड़ा , मुरड़ा के नाम से पुकारा जाता हे इस रोग के कारण पौधे की पत्तिया ऊपर और निचे की तरफ मुड़कर टेडी हो जाती है यह रोग मिर्च में थ्रिप्स और माइट किट के कारण होता है यह रोग मिर्च में अधिक होने पर पौधे का विकाश पूरी तरह रुक जाता है यह एक रोग मिर्च की फसल के उत्पादन को पूरी तरह प्रभावित कर देता है

बचाव
इस रोग से प्रभावित पौधे को खेत से हटा कर जला देना चाहिये यह रोग थ्रिप्स और माइट किट के कारण होता है इसके लिये आप सिंजेंटा कंपनी के पेगासस दवा का उपयोग कर सकते है बायर के एडमायर का उपयोग भी आप इस रोग के नियंत्रण के लिये कर सकते हे पौधे की छोटी अवस्था के लिये आप निम् तेल का उपयोग भी कर सकते है

2 – मिर्च में तना गलन रोग

मिर्च में तना गलन रोग के कारण पौधे तने के पास से और तने के ऊपर से सूखने लगते हे इस रोग से मिर्च का पौधा अचानक सुख जाता है

बचाव
ईस रोग से बचने के लिये लिए हमेशा फसल चक्र अपनाते रहे, खेत में फसल को बचाने के लिये खेत की तैयारी के समय ही खेत में गोबर की खाद के साथ में टरकोडर्मा को मिलाके खेत में बिखेर दे जिससे फसल में तना गलन रोग का नियंत्रण होता है मिर्च की रुपाई के बाद में भी आप प्रति बिगा खेत में 1 किलो ट्राइकोडर्म और आधा किलो कार्बनडेजिम स्प्रे या मिट्टी और खाद मि मिक्स करके खेत में बिखेर कर उपयोग करे ,इन दवाओं के समय पर उपयोग करने के बाद में यह रोग आप की फसल से पूरी तरह नियंत्रण में हो जाता हे जाता है

3 – मिर्च में फल गलन रोग

यह रोग मिर्च के पौधे में फफूंद के कारण होता है इस रोग से मिर्च गलकर सड़ने लगती हे इसके बचाव के लिये आप मेंकोजेब का स्प्रे अपनी फसल पर करे

4 – मिर्च मे ब्लाइट रोग उपचार

मिर्च कि खेती मे लगने वाले ब्लाईट रोग को झुलसा रोग के नाम से भी जाना जाता है यह रोग पौधे की जड़ों मे और पौधे के शीर्ष पत्तियों में लगता है

NoteMirch ki Kheti kaise karen

1 – टमाटर और मिर्च की खेती कभी भी साथ में पास-पास नहीं करनी चाहिये कयोकि दोनों में एक ही प्रकार के वायरस का अटेक ज्यादा होता है दोनों फसलों को एक साथ लगाने पर एन्थ्रक्नोज और बैक्टीरियल झुलसा रोग फैलने का खतरा हो सकता है

2 – मिर्च की खेती के साथ लहसुन, प्याज, और गेंदे की बुहाई करने से वायरस और कीड़ो का खतरा कम होता है और सूत्रकर्मी की बीमारी का खतरा कम हो जाता है

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ईस पोस्ट में मेने खेती से जुडी सभी जानकारी कैसे करे कब करे भूमि का चुनाव जलवायु नर्सरी कैसे तैयार करे खाद और बीज की जानकारी उन्नत किस्मो की जानकारी खर्च और लाभ की जानकारी मिर्च की खेती का समय गर्मी में मिर्च की खेती कैसे करे

सर्दी में mirch ki kheti कैसे करे लालमिर्च की खेती हरीमिर्च की खेती मिर्च की खेती में उत्पादन और लाभ की जानकारी आप के साथ साँझा की गई है अगली पोस्ट में में आप के लिए मिर्च की खेती में लगने वाले सभी रोग और किट के बारे में विस्तृत जानकारी लाऊंगा जो आप के लिए बहुत उपयोगी होगी

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